उन्हें भी जीने का अधिकार
कहते हैं कि ये पृथ्वी और इसके प्राणी सब इश्वर की रचना हैं! समाज ने अपनी सहूलियत के हिसाब से सब चीजों को जानवर , स्त्री , पुरुष , नपुंसक , जाती , धर्म के आधार पर बांट दिया है ! आज हम सबको और हमारे व्यवहार को कानून में बांध दिया गया है ! ताकि सब उसके दायरे में रहे और समाज में बुराइयाँ न फैलें ! हम कोई गलत काम न करें !आज हमारे समाज ने होमो सेक्सुअलिटी को डिक्रिमिनालाइज कर दिया है !
इसके चलते हमारे समाज का आधा भाग इसके खिलाफ है और कुछ इसके साथ ! कानून और अधिकार लोगों द्वारा लोगों के लिए बनाये गए हैं इससे सभी वर्ग के लोगों को समान अधिकार दिया गया है ! इस कानून में कहा गया है कि आपसी रजामंदी से अग ये लोग साथ रहने चाहते हैं तो साथ रहे ! पर कोई ज़ोर ज़बरदस्ती अगर होती है या कोई गुनाह करता है तो उसको आज ये अधिकार मिलने के बाद समाज का बहुत बड़ा भाग खुलकर सामने आया है ! नहीं तो यह लोग छुपकर यह कम करते थे और कई बार नौबत यहाँ तक आजाती थी कि खुदखुशी कर लेते ! कल आप खुद को ऐसे रख कर देखें कि आपकी शादी ऐसे इंसान से होती है जो कि आपके समानलिंगी है तो सोचिये आपकी जिंदगी और उसकी जिंदगी दोनों ही बर्बाद हो जायेगी !
वो इन्सान आपको शायद कभी बता भी न पायेगा कि वो गे या लेस्बियन है ! इसलिए हमें समाज के इस वर्ग के लिए सकारात्मक रुख अपनाते हुए इन्हें इनकी तरह जिंदगी जीने देनी चाहिए !
Deepti Shrivastava
Pran's Media Institute
Agra